Breaking

बहोरीबंद जनपद में ‘तालाबंदी’ का सवाल! CEO दफ्तर से उपाध्यक्ष कार्यालय तक लटके ताले, सातवें दिन भी जारी रहा धरना

 


बहोरीबंद। कटनी जिले की बहोरीबंद जनपद पंचायत में प्रशासनिक कामकाज को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) अभिषेक कुमार झा के कार्यालय में ताला लगे होने की तस्वीर सामने आने के साथ ही जनपद उपाध्यक्ष के कार्यालय पर भी लॉक होने की बात सामने आई है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि जनपद कार्यालय में ताले की स्थिति के बीच आम लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़े कामकाज किस तरह संचालित हो रहे हैं।

दरअसल, जनपद अध्यक्ष लाल कमल बंसल और CEO अभिषेक कुमार के बीच विवाद पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 16 सितंबर से जनपद अध्यक्ष अपने समर्थक सदस्यों के साथ CEO के खिलाफ धरने पर बैठे हैं और उन्हें हटाने तथा आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं।

आरोपों से गरमाई जनपद की सियासत

जनपद अध्यक्ष पक्ष की ओर से CEO पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कथित वित्तीय अनियमितताओं सहित कई आरोप लगाए गए हैं। अध्यक्ष पक्ष का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

वहीं, CEO अभिषेक कुमार ने पूर्व में इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जनपद के कार्य, बैठकें और योजनाएं नियमानुसार संचालित की जा रही हैं।

यानी एक तरफ जनपद अध्यक्ष जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर हैं, तो दूसरी तरफ CEO पक्ष आरोपों को खारिज कर रहा है। इस टकराव के बीच अब कार्यालयों में लगे ताले ने पूरे विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

कामकाज पर उठे सवाल



सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि CEO कार्यालय और जनपद उपाध्यक्ष कार्यालय पर ताले लगे हैं, तो पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से जुड़े जरूरी कार्य किस व्यवस्था के तहत आगे बढ़ रहे हैं?

जनपद पंचायत ग्रामीण क्षेत्र में विकास योजनाओं, पंचायतों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कार्यालयीन गतिविधियों को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब प्रशासन की ओर से सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

धरना सातवें दिन भी जारी

जनपद अध्यक्ष लाल कमल बंसल का धरना सातवें दिन भी जारी रहने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले भी अध्यक्ष और सदस्यों की ओर से CEO को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।

विवाद के बीच जनपद अध्यक्ष पक्ष की ओर से CEO पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि CEO पक्ष इन आरोपों को निराधार बता रहा है। ऐसे में किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने के बजाय निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

अब प्रशासन के सामने कई सवाल

बहोरीबंद जनपद में जारी इस विवाद के बीच निगाहें अब जिला प्रशासन की ओर हैं।

CEO कार्यालय में ताला किस वजह से लगा है?
उपाध्यक्ष कार्यालय पर लॉक की स्थिति क्यों बनी?
क्या इससे जनपद के नियमित कामकाज पर असर पड़ रहा है?
अध्यक्ष पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कब होगी?
और विवाद का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा?

इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से ही स्पष्ट हो सकेंगे।

फिलहाल बहोरीबंद जनपद पंचायत में धरना, आरोप और कार्यालयों में ताले—इन तीनों ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है।

कटनी ब्यूरो चीफ हीरा विश्वकर्मा की कलम से...

Post a Comment

Previous Post Next Post