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गणेश पंडाल बने संस्कारों की पाठशाला, कैमोर में बड़ी स्क्रीन पर दिखाई जा रही ‘हनुमान अंश’

 

आरती के बाद पंडालों में शुरू होती है धार्मिक फिल्म, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक जुट रही भीड़; नगर परिषद अध्यक्ष पलक नमित ग्रोवर की पहल की चर्चा

कैमोर। गणपति उत्सव के दौरान कैमोर में भक्ति का माहौल अब सिर्फ पूजा और आरती तक सीमित नहीं रहा। शहर के कई गणेश पंडालों में धार्मिक आयोजन के साथ बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने की पहल भी देखने को मिल रही है।

नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती पलक नमित ग्रोवर के मार्गदर्शन में शहर के प्रमुख गणेश पंडालों में बड़े प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। इन स्क्रीन पर धार्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’ का प्रदर्शन किया जा रहा है। शाम की आरती के बाद शुरू होने वाले इस आयोजन को देखने के लिए विभिन्न आयु वर्ग के लोग पंडालों में पहुंच रहे हैं।

आजाद चौक से एसीसी आर्टिजन कॉलोनी तक स्क्रीनिंग

जानकारी के मुताबिक आजाद चौक, मुरलीधर मंदिर के समीप एसीसी कोऑपरेटिव सोसाइटी क्षेत्र और एसीसी आर्टिजन कॉलोनी सहित कई स्थानों पर यह व्यवस्था की गई है।

आरती के बाद जैसे ही बड़ी स्क्रीन पर फिल्म शुरू होती है, पंडालों में मौजूद श्रद्धालु वहीं रुककर इसका आनंद लेते नजर आते हैं। बच्चों और महिलाओं की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी देखने को मिल रही है।

मोबाइल स्क्रीन के दौर में धार्मिक फिल्मों के जरिए संस्कारों का संदेश

आयोजकों से जुड़े लोगों का कहना है कि आज के दौर में बच्चों और युवाओं का बड़ा समय मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन पर गुजरता है। ऐसे में गणेश उत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से उन्हें भारतीय संस्कृति, धार्मिक कथाओं और सकारात्मक संदेशों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इस पहल के पीछे उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि त्योहार केवल पूजा तक सीमित न रहें, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने तथा नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक संदेश पहुंचाने का माध्यम भी बनें।

पंडालों में बढ़ी रौनक, नागरिकों ने की पहल की सराहना

बड़ी स्क्रीन पर फिल्म देखने के लिए शाम के समय पंडालों में लोगों की भीड़ बढ़ रही है। गणेश उत्सव समितियों और स्थानीय नागरिकों की ओर से भी इस पहल की सराहना की जा रही है।

धार्मिक वातावरण, गणपति बप्पा की आरती और उसके बाद बड़े पर्दे पर फिल्म का प्रदर्शन—कैमोर के कई पंडालों में उत्सव की रौनक को एक अलग रंग देता नजर आ रहा है।

कैमोर ब्यूरो गुलशन चक्रवर्ती की कलम से...

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