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विशाखापट्टनम से मध्यप्रदेश तक गांजे की खेप, जबलपुर में तस्करी का बड़ा खुलासा!

 

पेंट के डिब्बों की आड़ में चल रहा था करोड़ों के गांजे का खेल! जबलपुर में 871 किलो से ज्यादा गांजा जब्त, यूपी-बंगाल के दो आरोपी गिरफ्तार

जबलपुर। मालवाहक कंटेनर में पेंट के डिब्बों के बीच छिपाकर गांजे की करोड़ों रुपये की खेप ले जाई जा रही थी। बाहर से कंटेनर सामान्य मालवाहक वाहन नजर आ रहा था, लेकिन उसके भीतर नशे का बड़ा जखीरा छिपा था। जबलपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच और गोसलपुर थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस कथित अंतरराज्यीय तस्करी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कंटेनर से 871 किलो 95 ग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 4 करोड़ 35 लाख 55 हजार रुपये बताई गई है। मौके से उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

इस कार्रवाई में गांजे के अलावा 412 पेंट के डिब्बे और तस्करी में इस्तेमाल किया जा रहा कंटेनर भी जब्त किया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी ने एक बार फिर अंतरराज्यीय नशा तस्करी के नेटवर्क की ओर पुलिस का ध्यान खींचा है।

NH-30 पर पुलिस की घेराबंदी, भागने की कोशिश नाकाम

पुलिस के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2026 को गोसलपुर थाना क्षेत्र में मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कंटेनर के जरिए भारी मात्रा में गांजे का परिवहन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच और गोसलपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने निगरानी शुरू कर दी।

इसी दौरान मुस्करा मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर जबलपुर की ओर से तेज रफ्तार में आ रहे संदिग्ध कंटेनर क्रमांक NL-01-AC-7191 को पुलिस ने देखा। टीम ने वाहन का पीछा किया और मोहतरा टोल के पास घेराबंदी कर उसे रोक लिया।

पुलिस के अनुसार, कंटेनर में मौजूद चालक और उसके साथी ने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान धर्मवीर सिंह (45), निवासी अलीगढ़, उत्तर प्रदेश और विक्रम करमाकर (24), निवासी दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई।

पेंट के डिब्बे और बोरियों के पीछे छिपा था नशे का जखीरा

कंटेनर की तलाशी के दौरान उसमें 412 पेंट के डिब्बे और 28 बोरियां रखी मिलीं। जब पुलिस ने बोरियों की जांच की तो खाकी रंग के टेप से लिपटे पैकेटों में गांजा भरा हुआ मिला। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के झांसी की नारकोटिक्स विंग की टीम भी मौके पर पहुंच गई, जो कंटेनर की गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

एनडीपीएस एक्ट के निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए जब गांजे का वजन कराया गया तो कुल मात्रा 871 किलो 95 ग्राम निकली। पुलिस ने पूरी खेप की कीमत करीब 4 करोड़ 35 लाख 55 हजार रुपये आंकी है।

विशाखापट्टनम से अंबाला के सफर में बदला तस्करी का कथित खेल

पुलिस पूछताछ में कंटेनर चालक धर्मवीर सिंह ने कथित तौर पर बताया कि वह 18 अक्टूबर को अपने साथी विक्रम के साथ विशाखापट्टनम से माल लेकर निकला था और 19 अक्टूबर को अंबाला के लिए रवाना हुआ था।

आरोपी के बयान के मुताबिक, ओडिशा के बलांगीर निवासी प्रभात साहू ने उससे संपर्क कर मध्यप्रदेश में गांजे की खेप पहुंचाने के लिए कहा था। चालक ने यह भी बताया कि वह पहले भी कथित तौर पर उक्त व्यक्ति के कहने पर गांजे की खेप मध्यप्रदेश ला चुका है और प्रत्येक फेरे के बदले उसे एक लाख रुपये मिलने थे।

पुलिस के अनुसार, 27 अक्टूबर को प्रभात साहू के यहां से गांजे की 28 बोरियां कंटेनर में लोड की गई थीं। खेप को मध्यप्रदेश के मैहर से पहले एक जियो पेट्रोल पंप के पास उतारने की बात बताई गई थी। पुलिस अब आरोपी के बयानों के आधार पर इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।

दो राज्यों की टीमों की संयुक्त कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक जबलपुर संपत उपाध्याय के निर्देश पर मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जोन-4 अनु बेनिवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध जितेन्द्र सिंह, एसडीओपी सिहोरा मोहन्ती मरावी और डीएसपी क्राइम उमेश तिवारी के मार्गदर्शन में संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

आरोपियों के कब्जे से 871 किलो 95 ग्राम गांजा, 412 पेंट के डिब्बे और तस्करी में इस्तेमाल कंटेनर जब्त किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 8/20 एवं 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है।

कार्रवाई में इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका

इस कार्रवाई में अपराध थाना प्रभारी शैलेष मिश्रा और गोसलपुर थाना प्रभारी भावना तिवारी के मार्गदर्शन में उपनिरीक्षक अर्चना सल्लाम, आरक्षक सोनू झा, शुभम दत्त शर्मा तथा क्राइम ब्रांच के सहायक उपनिरीक्षक अशोक मिश्रा, संतोष पाण्डे, मोहन तिवारी, प्रधान आरक्षक हितेन्द्र सिंह, मोहन सिंह, मनीष सिंह, सुतेन्द्र यादव, आरक्षक रितेश शुक्ला, पंकज सिंह, इंद्रजीत यादव, संतोष शाह, विमल विश्वकर्मा, शिव सिंह बघेल और प्रीतम उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वहीं झांसी नारकोटिक्स विंग के उपनिरीक्षक मनीष कुमार, आरपीएनओ गजेन्द्र सिंह, विमल कुमार और प्रदीप कुमार ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।

अब जांच का अहम पहलू यह है कि करोड़ों की यह खेप किन-किन ठिकानों तक पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे सक्रिय कथित तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।

ब्यूरो ऋषि रजक

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